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Mantra Rig 01.093.010

MANTRA NUMBER:

Mantra 10 of Sukta 93 of Mandal 1 of Rig Veda

Mantra 4 of Varga 29 of Adhyaya 6 of Ashtak 1 of Rig Veda

Mantra 104 of Anuvaak 14 of Mandal 1 of Rig Veda

 

 

MANTRA DEFINITIONS:

ऋषि:   (Rishi) :- गोतमो राहूगणपुत्रः

देवता (Devataa) :- अग्नीषोमौ

छन्द: (Chhand) :- गायत्री

स्वर: (Swar) :- षड्जः

 

 

THE MANTRA

 

The Mantra with meters (Sanskrit)

अग्नी॑षोमाव॒नेन॑ वां॒ यो वां॑ घृ॒तेन॒ दाश॑ति तस्मै॑ दीदयतं बृ॒हत्

 

The Mantra without meters (Sanskrit)

अग्नीषोमावनेन वां यो वां घृतेन दाशति तस्मै दीदयतं बृहत्

 

The Mantra's transliteration in English

agnīomāv anena vā yo vā ghtena dāśati | tasmai dīdayatam bhat ||

 

The Pada Paath (Sanskrit)

अग्नी॑षोमौ अ॒नेन॑ वा॒म् यः वा॒म् घृ॒तेन॑ दाश॑ति तस्मै॑ दी॒द॒य॒त॒म् बृ॒हत्

 

The Pada Paath - transliteration

agnīomau | anena | vām | ya | vām | ghtena | dāśati | tasmai | dīdayatam | bhat ||


महर्षि दयानन्द सरस्वती  Maharshi Dayaananda Saraswati

०१।–०९३।१०

मन्त्रविषयः-

एतदनुष्ठातुः किं जायत इत्युपदिश्यते।

इसके अनुष्ठान करनेवाले को क्या होता है, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है।

 

पदार्थः-

(अग्नीषोमौ) विद्युत्पवनौ (अनेन) प्रत्यक्षेण (वाम्) युवयोर्मध्ये (यः) एकः (वाम्) एतयोः सकाशात् (घृतेन) आज्येनोदकेन वा (दाशति) आहुतीर्ददाति (तस्मै) (दीदयतम्) प्रकाशयतः (बृहत्) महत् ॥१०॥

(यः) जो मनुष्य (वाम्) इनके बीच (अनेन) इस (घृतेन) घी वा जल से आहुतियों को देता है वा (वाम्) इनकी उत्तेजना से उपकारों को ग्रहण करता है उसके लिये (अग्नीषोमा) बिजुली और पवन (बृहत्) बड़े विज्ञान और सुख को (दीदयतम्) प्रकाशित करते हैं ॥१०॥

 

अन्वयः-

यो वामेतयोर्मध्येऽनेन घृतेनाहुतीर्दाशति वां सकाशादुपकारान् गृह्णाति तस्मा अग्नीषोमौ बृहद्दीदयतम् ॥१०॥

 

 

भावार्थः-

ये मनुष्याः क्रियायज्ञानुष्ठानं कुर्वन्ति तेऽस्मिञ्जगति महत्सौभाग्यं प्राप्नुवन्ति ॥१०॥

जो मनुष्य क्रियारूपी यज्ञों का अनुष्ठान करते हैं वे इस संसार में अत्यन्त सौभाग्य को प्राप्त होते हैं ॥१०॥

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