Rig Veda‎ > ‎Mandal 01‎ > ‎sukta 075‎ > ‎

Mantra Rig 01.075.002

MANTRA NUMBER:

Mantra 2 of Sukta 75 of Mandal 1 of Rig Veda

Mantra 2 of Varga 23 of Adhyaya 5 of Ashtak 1 of Rig Veda

Mantra 11 of Anuvaak 13 of Mandal 1 of Rig Veda

 

 

MANTRA DEFINITIONS:

ऋषि:   (Rishi) :- गोतमो राहूगणः

देवता (Devataa) :- अग्निः

छन्द: (Chhand) :- निचृद्गायत्री

स्वर: (Swar) :- षड्जः

 

 

THE MANTRA

 

The Mantra with meters (Sanskrit)

अथा॑ ते अङ्गिरस्त॒माग्ने॑ वेधस्तम प्रि॒यम् वो॒चेम॒ ब्रह्म॑ सान॒सि

 

The Mantra without meters (Sanskrit)

अथा ते अङ्गिरस्तमाग्ने वेधस्तम प्रियम् वोचेम ब्रह्म सानसि

 

The Mantra's transliteration in English

athā te agirastamāgne vedhastama priyam | vocema brahma sānasi 

 

The Pada Paath (Sanskrit)

अथ॑ ते॒ अ॒ङ्गि॒रः॒ऽत॒म॒ अ॒ग्ने॒ वे॒धः॒ऽत॒म॒ प्रि॒यम् वो॒चेम॑ ब्रह्म॑ सा॒न॒सि

 

The Pada Paath - transliteration

atha | te | agira-tama | agne | vedha-tama | priyam | vocema | brahma | sānasi 


महर्षि दयानन्द सरस्वती  Maharshi Dayaananda Saraswati

०१।०७५।०२

मन्त्रविषयः-

पुनस्त प्रत्यन्ये किं वदेयुरित्याह।

फिर उससे विद्वान् क्या कहें, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है।

 

पदार्थः-

(अथ) अनन्तरम् (ते) तुभ्यम् (अङ्गिरस्तम्) अङ्गति गच्छति जानाति सोतिशयितस्तत्संबुद्धौ तस्मै वा (अग्ने) विज्ञानस्वरूप (वेधस्तम) अतिशयेन सर्वाविद्याधर (प्रियम्) प्रीणाति यत् तत् (वोचेम) उपदिशेम (ब्रह्म) वेदचतुष्ट्यम् (सानसि) सनातनम् ॥२॥

हे (अङ्गिरस्तम) सब विद्याओं के जानने और (वेधस्तम) अत्यन्त धारण करनेवाले (अग्ने) विदावन् ! जैसे हम लोग वेदों को पढ़के (अथ) इसके पीछे (ते) तुझे (सानसि) सदर से वर्त्तमान (प्रियम्) प्रीतिकारक (ब्रह्म) चारों वेदों का (वोचेम) उपदेश करें वैसे ही तू कर ॥२॥

 

अन्वयः-

हे अङ्गिरस्तम वेधस्तमाग्ने विद्वन यथा वयं वेदानधीत्याथ ते तुभ्यं सानसिप्रियं ब्रह्म वोचेम तथैव त्व विधेहि ॥२॥

 

 

भावार्थः-

अत्र वाचकलुप्तोपमालङ्कारः। नह्युपदेशेन विना कस्यचिन्मनुष्यस्य परमेश्वरविषयं विद्युदादिविषयं वा ज्ञानं संभवति तस्मात्सर्वैर्मनुष्यैरुपदेशश्रवणे सदा कर्त्तव्ये ॥२॥  

इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। वेदादि सत्यशास्त्रों के उपदेश के विना किसी मनुष्य को परमेश्वर और विद्युत् अग्नि आदि पदार्थों के विषय का ज्ञान नहीं होता ॥२॥   

Comments