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Mantra Rig 01.042.005

MANTRA NUMBER:

Mantra 5 of Sukta 42 of Mandal 1 of Rig Veda

Mantra 5 of Varga 24 of Adhyaya 3 of Ashtak 1 of Rig Veda

Mantra 82 of Anuvaak 8 of Mandal 1 of Rig Veda

 

 

MANTRA DEFINITIONS:

ऋषि:   (Rishi) :- कण्वो घौरः

देवता (Devataa) :- पूषा

छन्द: (Chhand) :- गायत्री

स्वर: (Swar) :- षड्जः

 

 

THE MANTRA

 

The Mantra with meters (Sanskrit)

तत्ते॑ दस्र मन्तुम॒: पूष॒न्नवो॑ वृणीमहे येन॑ पि॒तॄनचो॑दयः

 

The Mantra without meters (Sanskrit)

तत्ते दस्र मन्तुमः पूषन्नवो वृणीमहे येन पितॄनचोदयः

 

The Mantra's transliteration in English

ā tat te dasra mantumaann avo vṛṇīmahe | yena pitn acodaya 

 

The Pada Paath (Sanskrit)

तत् ते॒ द॒स्र॒ म॒न्तु॒ऽमः॒ पू॒ष॒न् अवः॑ वृ॒णी॒म॒हे॒ येन॑ पि॒तॄन् अचो॑दयः

 

The Pada Paath - transliteration

ā | tat | te | dasra | mantu-ma | pūan | ava | vṛṇīmahe | yena | pitn | acodayaḥ 


महर्षि दयानन्द सरस्वती  Maharshi Dayaananda Saraswati

०१।०४२।०

मन्त्रविषयः-

पुनः स न्यायाधीशः कीदृशो भवेदित्युपदिश्यते।

फिर वह न्यायाधीश कैसा होवे, इस विषय का उपदेश अगले मंत्र में किया है।

 

पदार्थः-

(आ) समन्तात् (तत्) पूर्वोक्तं वक्ष्यमाणं च (ते) तव (दस्र) दुष्टानामुपक्षेप्तः (मन्तुमः) मन्तुः प्रशस्तं ज्ञानं विद्यते यस्य तत्संबुद्धौ (पूषन्) सर्वथा पुष्टिकारक (अवः) रक्षणादिकम् (वृणीमहे) स्वीकुर्वीमहि (येन) (पितॄन्) वयोज्ञानवृद्धान् (अचोदयः) धर्मे प्रेरयेः। अत्र लिङर्थे लङ् ॥

हे (दस्र) दुष्टों को नाश करने (मन्तुमः) उत्तम ज्ञानयुक्त (पूषन्) सर्वथा पुष्टि करनेवाले विद्वान् ! आप (येन) जिस रक्षादि से (पितॄन्) अवस्था वा ज्ञान से वृद्धों को (अचोदयः) प्रेरणा करो (तत्) उस (ते) आपके (अवः) रक्षादि को हम लोग (आवृणीमहे) सर्वथा स्वीकार करें ॥

 

अन्वयः-

हे दस्र ! मन्तुमः पूषन् विद्वँस्त्वं येन पितॄनचोदयस्तत् ते तवावो रक्षणादिकं वयं वृणीमहे ॥

                                

 

भावार्थः-

मनुष्या यथा प्रेमप्रीत्या सेवनेन जनकादीनध्यापकादीन् ज्ञानवयोवृद्धांश्च प्रीणयेयुस्तथैव सर्वासां प्रजानां सुखाय दुष्टान् दण्डयित्वा श्रेष्ठान्सुखयेयुः ॥

जैसे प्रेम प्रीति के साथ सेचन करने से उत्पन्न करने वा पढ़ानेवाले ज्ञान वा अवस्था से वृद्धों को तृप्त करें वैसे ही सब प्रजाओं के सुख के लिये दुष्ट मनुष्यों को दण्ड दे के धार्मिकों को सदा सुखी रक्खें ॥

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